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राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछा- निहत्थे सैनिकों को शहीद होने के लिए क्यों भेज दिया, चीन की हमारे जवानों को मारने की हिम्मत कैसे हुई

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गलवान घाटी की घटना को लेकर एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा- सरकार ने बिना हथियारों के जवानों को शहीद होने के लिए क्यों भेज दिया। चीन की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वो हमारे जवानों की हत्या कर सके। 
राहुल ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसा था। राहुल ने पूछा था- मोदी चुप क्यों हैं? इस मामले को वे छिपा क्यों रहे हैं? बता दें कि सोमवार रात गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी। भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के 43 जवानों के भी मारे जाने या घायल होने की खबर आई। 

चीन की हिम्मत कैसे हुई?
राहुल ने गुरुवार को एक ट्वीट किया। इसमें फिर सरकार पर तंज कसा। कहा- चीन की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि वो हमारे निहत्थे सैनिकों की हत्या कर सके। बिना हथियारों के हमारे सैनिकों को वहां शहीद होने के लिए किसने भेजा। 

मोदी से मांगा था जवाब
राहुल ने बुधवार को भी एक ट्वीट किया था। इसमें सीधे प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए उनसे गलवान घाटी की घटना पर जवाब मांगा था। राहुल ने कहा था- मोदी चुप क्यों हैं? इस मामले को वे छिपा क्यों रहे हैं? अब बहुत हो चुका, हमें पता चलना चाहिए कि आखिर हुआ क्या था? राहुल ने कहा कि चीन हमारे सैनिकों को मारने और हमारी जमीन पर आने की हिम्मत कैसे कर सकता है?

राजनाथ सिंह को टैग किया था
बुधवार को ही राहुल ने एक और ट्वीट किया। इस बार उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ को टैग करते हु कुछ सवाल पूछे थे। राहुल ने पूछा था- आपने चीन का नाम क्यों नहीं लिया। शोक व्यक्त करने में दो दिन क्यों लगाए। जब सैनिक शहीद हो रहे थे तो आप रैली क्यों कर रहे थे। आप छिप क्यों रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष बोलीं- प्रधानमंत्री देश को बताएं कि चीन ने ऐसा कैसे किया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को कहा था- चीन की हरकत को लेकर आज हर तरफ गुस्सा है। प्रधानमंत्री को आगे आना चाहिए और देश को बताना चाहिए कि आखिर चीन ने ऐसा दुस्साहस कैसे किया। चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा कैसे किया। हमारे 20 जवान कैसे शहीद हो गए।

हम सरकार के साथ चट्टान के समान खड़े हैं- कांग्रेस

बुधवार को ही कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा था- हम सरकार और राष्ट्र के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। चीन को उसकी आंखों में आंखें डालकर वाजिब जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सभी दलों की बैठक बुलाने का प्रधानमंत्री का कदम अच्छा है। यह प्रशंसनीय है। मगर इसमें थोड़ी देर हो गई है। यदि एक महीने पहले प्रधानमंत्री ने यह मीटिंग बुलवाई होती तो हम और भी ज्यादा मदद कर सकते थे।

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