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बैंड, बाजा, बारात लेकर पति पहुंचा न्यायालय, जज ने पत्नी से कराया समझौता, दिया आशीर्वाद

जितेन्द्र पुरोहित
देवास ।
 नेशनल लोक अदालत में वैसे तो कई प्रकरणों का समझौता हुआ लेकिन द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने एक पारिवारिक विवाद को अनुठे तरीके से समझौता कर सम्पन्न करवाया। तीन बच्चों के माता -पिता विवाद के चलते तलाक का आवेदन दे चुके थे। लेकिन माननीय न्यायाधीश ने सुझबुझ से पति -पत्नि के बीच सुलह कराकर पति को दुल्हा बनाकर घोड़ी पर बैठाकर न्यायालय बुलवाया और न्यायालय कक्ष में आपस में वर माला पहनावाकर आशीर्वाद दिया।

पवन कुमावत का विवाह ग्राम छोटा मालसापुर की करूणा के साथ 26 अप्रैल 2008 को सम्पन्न हुआ था। विवाह के उपरांत उन्हें दो पुत्र, एक पुत्री की प्राप्ती हुई थी दोनों के बीच कुछ बातों को लेकर आपस में खूब विवाद होने लगे थे और मामला थाने तक जा पहुंचा था। तब अनुविभागीय अधिकारी देवास न्यायालय के माध्यम से सहमती कर बच्चों का बंटावरा उनकी इच्छानुसार कर दिया गया। इसके बाद पति ने तलाक का प्रकरण कुटुंब न्यायालय में प्रस्तुत किया। जहां मध्यस्ता की कार्रवाई न्यायाधीश गंगाचरण दुबे के समक्ष रखी गई। मध्यस्ता के दौरान कई बार बैठे हुई जो विफल हुई। चूंकि दोनों पति पत्नि पुरानी बातों को लेकर एक दुसरे से अत्याधिक नाराज थे दोनों एक दुसरे के प्रति शक का भाव भी रखते थे। करूणा के कहना था कि उसकी सास ने आज तक उसे कपड़े नहीं दिए। पति उसे प्रेम नहीं करता है वहीं पति का कहना था कि पत्नि के भाई ने उसे विवाह में घोड़ी पर बैंठने नहीं दिया बारात की विडियो रिकार्डिग भी नहीं की गई। तब न्यायालय ने एक युक्ती सुझाई की क्यों ना लोक अदालत में पत्नि की इच्छानुसार पति की मां उसे साड़ी पहनाएं और पति घोड़ी पर बैठकर पत्नि को अपने घर ले जाएं। जिस पर दोनों पक्ष राजी हो गए। फिर क्या था तीन बच्चों के पिता पवन बकायदा घोड़ी पर बैठकर बारात लेकर धुमधाम से जिला न्यायालय पहुंचा। जहां द्वार पर उसकी अगवानी की गई और न्यायालय कक्ष के अंदर जजों ने वर-वधु को आशीर्वाद देकर एक -दूसरे को वर माला पहनवाई और उसके बाद दोनों एक साथ हो लिए। न्यायालय ने कहा नई घोड़ी, नया दामा। पुरानी कड़वी बातो ंको भुलकर नई शुरूआत किसी भी रूप में की जानी चाहिए यही सफल दाम्पत्य का आधार है।

BJ-2589 2019-12-15 09:42:28 भोपाल
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