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हड़ताल पर गए संविदा स्वास्थ्य कर्मी अब निशुल्क देना चाहते हैं अपनी सेवा शासन प्रस्ताव पर नहीं दिखा रहा कोई दिलचस्पी, अजीब संकट में फंसे हड़ताली

बिलासपुर । कोरोना संकट के बीच प्रदेश के 13,000 संविदा स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर चले गए, जिनमें डॉक्टर, नर्स ,लैब टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी भी शामिल है ।नियमितीकरण की मांग के साथ प्रदेश भर में हड़ताल पर गए इन कर्मचारियों पर ना तो एस्मा का डर दिखा और न हीं इनकी सेवा समाप्त करने की चेतावनी के बाद ही यह लौटे । स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं कहा था कि यह समय हड़ताल पर जाने का नहीं है लेकिन प्रदेश सरकार को ब्लैकमेल करते हुए जिस तरह से इन संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने इस संकट की घड़ी में हड़ताल किया है उससे उन्होंने आम लोगों की भी सहानुभूति खो दी है ।अब इस मामले में स्वास्थ्य कर्मी यूटर्न लेते दिखाई दे रहे हैं। इनके द्वारा हड़ताल के सातवें दिन काम पर लौटने की इच्छा जताई गई लेकिन अब शासन की ओर से उनके इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की गई ।हड़ताल को नाकाम होता देख संविदा स्वास्थ्य कर्मी वोलेंटियर के रूप में निशुल्क अपनी सेवा देना चाहते हैं लेकिन अब शासन इसे भी स्वीकार नहीं कर रहा। इसे कहते हैं चौबे जी चले थे छब्बे बनने, दुबे बनकर लौट आए। कहां तो नियमितीकरण की मांग पर यह कर्मचारी अड़े थे और अब कहां निशुल्क सेवा देने का प्रस्ताव भी सरकार स्वीकार नही कर रही हैं । असल मे शासन ने तमाम चुनौतियों के बावजूद इनका विकल्प तलाश लिया है और फिलहाल शासन इनके आगे झुकने को तैयार नहीं, जिससे अजीब सूरते हाल बन चुकी है ।लगता है नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर गए संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का अपने नेताओं से मोहभंग हो चुका है, इसीलिए वे काम पर वापस लौटना चाहते हैं। वैसे नियमितीकरण की मांग अनुचित नहीं है, लेकिन जिस तरह से कोरोना संकट काल मे हड़ताल का फैसला लिया गया उसकी टाइमिंग को लेकर आलोचक हैरान है। यही कारण है कि यह हड़ताल अब पूरी तरह से नाकाम होती नजर आ रही है।

BJ-2589 2020-09-26 23:00:51 रायपुर
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