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ऑनलाइन बैंकिंग में गड़बड़ी, 200 खातों से निकाले गए 20 लाख रुपए

देवभोग . ऑनलाइन बैंकिंग में गड़बड़ी के कारण ग्रामीण बैंकों के विभिन्न खाताें से करीब 20 लाख रुपए निकल गए। रकम किसी और ने नहीं बल्कि खुद खाताधारकों ने निकाली। मगर रकम किसकी थी, कहां से आई, इसका नुकसान किसे होगा और भरवाई कौन करेगा यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। 


यह गड़बड़ी हुई देवभोग क्षेत्र में काम कर रहे निजी बैंक से अधिकृत एजेंटों के जरिये। शुक्रवार की शाम 6 बजे बरकानी गांव कुछ लोगों ने एजेंट के पास से रुपए निकाले तो उनके खाते से बैलेंस नहीं घटा। यानी किसी के खाते में 10 हजार रुपए थे, उसने 5 हजार निकाले, तब भी खाते में बैलेंस 10 हजार ही दिख रहा था।


देखते ही देखते अफवाह फैली कि पीएम मोदी ने जो कालाधन लौटने का भरोसा दिया था, खाते में वही रुपए आ गए हैं। बस ग्रामीण बैंकों से जुड़े खाताधारकों की ऐसे एजेंटों के यहां कतार लग गई और सब छोटी-छोटी रकम निकालने लगे। निजी एजेंटों के हिसाब के मुताबिक शाम 6 से रात 11 बजे तक 200 खाताधारकों के अकाउंट से कम से कम 20 लाख रुपए निकाले गए। यह गड़बड़ी सिर्फ देवभोग ही नहीं बल्कि आसपास के कस्बों मैनपुर, फिंगेश्वर में भी हुई। ग्रामीण बैंक के अफसरों ने यह तो माना कि ऑनलाइन सिस्टम में कुछ गड़बड़ी हुई है, लेकिन उन्हें अभी यह स्पष्टता नहीं है कि यह रकम ग्रामीण बैंक के खाते से घटी है या नहीं। बैंकिंग पर निगरानी रखने वाले जानकार इस गड़बड़ी की जांच कर रहे हैं। 

उनका मानना है कि संभव है कि एजेंट जिस निजी बैंक से अधिकृत हैं, उनके जरिये ये रकम आई हो, और इसे आधार से लिंक किए गए खातों के जरिये निकाला गया हो। गौरतलब है िक बैंक, एटीएम कम होने से
ग्रामीण क्षेत्रों में यह एजेंट लेन-देन की प्रक्रिया बैंकिंग एप के जरिये करते हैं।

  
कुछ रिटेलर एजेंटों के पास अकाउंट से पैसे निकलने के बाद भी बैलेंस दिखना शुरू हुआ। मनी ट्रांसफर एप के जरिये आधार नंबर से लिंक्ड ग्रामीण बैंकों के खाताधारकों को इन एजेंटों ने 20 लाख रुपए से ज्यादा ट्रांजेक्शन कर दिया। ग्रामीण बैंक (धमतरी क्षेत्र) के रीजनल मैनेजर ओपी तिवारी ने भी स्वीकारा कि ऑनलाइन बैंकिंग की फॉल्ट से देवभोग ही नहीं छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों से इस तरह की शिकायत आई है, लेकिन बैंक अभी ट्रेस नहीं कर सके हैं कि यह रकम घटी कहां से है। एनआईसीटी भी इसकी जांच कर रहा है। तिवारी ने कहा कि भरपाई का एक तरीका यही हो सकता है कि ट्रांजेक्शन आईडी से खाताधारकों की पहचान की जाए और उनसे रकम वसूली की जाए। लापरवाही बरतने वाले एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।

 

बरकानी में एक निजी बैंक के कार्पोरेट बैंक कोऑर्डिनेटर के तहत काम करनेवाले एजेंटों ने रकम ट्रांसफर की। फिर पास के गांव घुमरगुड़ा, कैठपदर, सीनापाली, भरूवामुड़ा, मुरगुड़ा समेत आसपास के 10 से ज्यादा गांवों में खबर फैली और 5 घंटे में ही बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन हो गया। इस रीटेल बैंकिंग सिस्टम पर निगरानी रखने वाली संस्था नेटवर्क फाॅर इंफॉर्मेशन एंड कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी (एनआईसीटी) ने गड़बड़ी की आशंका पर रात 11 बजे एजेंटों की आईडी ब्लॉक कर दी। इसके बाद से किसी तरह का लेन-देन बंद हो गया। 

 

बरकानी निवासी कुर्तीराम ने एजेंट का काम करते हैं। कुर्तीराम ने अपनी पत्नी, माता-पिता समेत 15 लोगों के आधार लिंक कर अधिकृत आईडी से 1 लाख 80 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिये। उन्होंने तत्काल इस खाते से एक्सिस बैंक के दूसरे खाते में 1 लाख 20 हजार रुपए ट्रांसफर भी कर दिए। बरकानी के ही एजेंट हेमलाल नागेश, जयसिंह नागेश, पवन नागेश व सुरेंद्र पटेल ने करीब 60 लोगों के खातों में 9 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन कराया।

 

अभी गांवों में बैंक की शाखाएं और एटीएम कम हाेने के कारण बैंक मित्र की सेवाएं ली जा रहीं हैं। बैंकिंग सिस्टम को सभी लोगाें तक पहुंचाने के लिए दो तरह के बैंक मित्र काम करते हैं। एक कॉरपोरेट बैंक कोऑर्डिनेटर (बीसी) जिन्हें सीधे बैंक अधिकृत करता है और दूसरे कॉरपोरेट बीसी के रिटेलर एजेंट जो मोबाइल एप से ट्रांजेक्शन करते हैं। ये एजेंट आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक कॉरपोरेट बीसी से अनुबंधित बैंक से जुड़े होते हैं। एनआईसीटी के जरिये इनकी आईडी खोली जाती है। इनकी आईडी व मोबाइल एप से लिंक बैंकों के खाताधारकों से यह लेन-देन में सहयोग करते हैं। इनके जरिये एक बार में एक खाताधारक को अधिकतम 10 हजार तक के ट्रांजेक्शन करने का प्रावधान होता है।

BJ-2589 2019-12-15 09:36:57 रायपुर
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